अमर शहीद सरदार उधम सिंह की पुण्यतिथि: जलियांवाला बाग के नरसंहार का बदला लेने के लिए दी थी शहादत

अमर शहीद सरदार उधम सिंह की पुण्यतिथि: जलियांवाला बाग के नरसंहार का बदला लेने के लिए दी थी शहादत

छत्तीसगढ़: आज ही के दिन, यानी 31 जुलाई को महान क्रांतिकारी और अमर शहीद सरदार उधम सिंह को साल 1940 में फांसी दी गई थी। आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा देश उनके अदम्य साहस, देशप्रेम और बलिदान को नमन कर रहा है। सरदार उधम सिंह वही क्रांतिकारी थे जिन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता और पंजाब के तत्कालीन गवर्नर जनरल माइकल ओ डायर को लंदन में घुसकर गोली मारी थी और इस नृशंस हत्याकांड का बदला लिया था।

जलियांवाला बाग का काला सच और बदला:

  • नरसंहार (13 अप्रैल 1919): बैसाखी के दिन पंजाब के अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में रॉलेट एक्ट का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे निहत्थे स्त्री, पुरुषों और बच्चों पर ब्रिटिश फौज ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। ब्रिगेडियर जनरल आरईएच डायर के आदेश पर हुए इस नरसंहार में 1,000 से अधिक लोग शहीद हुए थे और 1,200 से ज्यादा घायल हुए थे। जान बचाने के लिए सैकड़ों लोगों ने एक कुएं में छलांग लगा दी थी, जिससे उनकी भी मौत हो गई थी।

  • माइकल ओ डायर की भूमिका: इस बर्बर गोलीकांड को तत्कालीन पंजाब के गवर्नर जनरल माइकल ओ डायर के इशारे पर अंजाम दिया गया था। घटना के समय सरदार उधम सिंह भी वहीं मौजूद थे। इस नरसंहार ने उनके मन में ऐसा गुस्सा भरा कि उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर देश की आजादी की लड़ाई में खुद को झोंक दिया और डायर को सबक सिखाने को अपने जीवन का मकसद बना लिया।

  • 21 साल बाद लिया बदला (13 मार्च 1940): मुख्य आरोपी जनरल डायर की मौत 1927 में ब्रेन हेमरेज से हो चुकी थी। इसके बाद उधम सिंह का मुख्य निशाना माइकल ओ डायर था। इसके लिए वे 6 साल तक लंदन में रहे। 13 मार्च 1940 को लंदन के 'कैक्सटोन हॉल' में एक बैठक के दौरान उधम सिंह ने किताब में रिवॉल्वर छुपाकर माइकल ओ डायर को गोली मार दी, जिससे उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

शहीद उधम सिंह की शहादत:

हत्या की इस घटना के तुरंत बाद सरदार उधम सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई।

अमर शहीद सरदार उधम सिंह सिर्फ एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध उठी वह बुलंद आवाज थे, जिसने ब्रिटिश साम्राज्यवादी हुकूमत की नींव तक हिला दी थी। उनका यह बलिदान हर भारतीय को सदैव राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता रहेगा।

संपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज