राष्ट्रपति भवन में बस्तर की गूंज: राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेताओं का किया अभिनंदन, कहा— "हिंसा छोड़ प्रगति के नए युग में बस्तर"

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में 'बस्तर पंडुम-2026' के विजेताओं से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बस्तर हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास, शिक्षा और प्रगति के नए युग में प्रवेश कर चुका है। जानिए इस ऐतिहासिक मुलाकात की पूरी खबर।

राष्ट्रपति भवन में बस्तर की गूंज: राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेताओं का किया अभिनंदन, कहा— "हिंसा छोड़ प्रगति के नए युग में बस्तर"

विशेष रिपोर्ट | नई दिल्ली देश के सर्वोच्च संवैधानिक भवन 'राष्ट्रपति भवन' का प्रांगण आज छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक छटा और युवाओं के आत्मविश्वास से गुंजायमान हो उठा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'बस्तर पंडुम-2026' के विजेताओं, लोक कलाकारों और प्रतिभावान युवाओं से मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया। इस गरिमामय आयोजन के दौरान राष्ट्रपति ने एक अत्यंत सशक्त संदेश देते हुए कहा कि बस्तर अब दशकों पुराने हिंसा, भय और अलगाव के दौर को पीछे छोड़कर शिक्षा, कला, विकास और शांति के एक नए स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है।

हिंसा के अंधेरे से विकास के उजाले की ओर कदम

समारोह में उपस्थित बस्तर के विभिन्न अंचलों से आए युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बस्तर की पहचान अब नक्सली हिंसा या संघर्षों से नहीं, बल्कि वहाँ की युवा पीढ़ी के सामर्थ्य, मेधा और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से बन रही है।

"बस्तर के युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि जब अवसर और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो परिवर्तन की बयार को कोई रोक नहीं सकता। बंदूक छोड़ किताबों, कला के कैनवास और सांस्कृतिक पहचान को थामने वाला बस्तर का हर युवा भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहा है। यह बदलाव केवल एक प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है।"

द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रपति

उन्होंने विशेष रूप से बस्तर की बेटियों और जनजातीय समुदायों के युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि देश की मुख्यधारा अब उनके स्वागत के लिए पूरी तरह से बांहें फैलाए खड़ी है।

क्या है 'बस्तर पंडुम' और इसका महत्व?

'पंडुम' शब्द का अर्थ गोंडी और स्थानीय जनजातीय बोलियों में 'त्योहार' या 'पवित्र उत्सव' होता है। 'बस्तर पंडुम-2026' बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पटल पर लाने की एक वृहद पहल है।

  • सांस्कृतिक महाकुंभ: इस उत्सव में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, जनजातीय संगीत, विलुप्त होती भाषा-बोलियों, पारंपरिक व्यंजनों और शिल्पकला की विधाओं को प्रदर्शित किया गया।

  • प्रतिभा की खोज: बस्तर के दूरदराज और अंदरूनी इलाकों के स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और युवाओं को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रहा।

  • सकारात्मक दिशा: इस आयोजन ने माओवादी प्रभावित रहे क्षेत्रों में युवाओं को उनकी जड़ों और सांस्कृतिक गौरव से जोड़कर जीवन को एक नई, सुरक्षित और रचनात्मक दिशा प्रदान की है।

मुख्य बिंदु और कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ

प्रमुख पहलू विवरण व प्रभाव
सांस्कृतिक संरक्षण बस्तर की विश्व प्रसिद्ध जनजातीय कला (जैसे ढोकरा आर्ट, काष्ठ कला और माटी कला) को वैश्विक पहचान।
शिक्षा व अधोसंरचना अंदरूनी इलाकों में बंद पड़े स्कूलों का पुनः खुलना और नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का संचालन।
युवा सशक्तिकरण कला, कौशल विकास और स्वरोजगार के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसरों का सृजन।
मुख्यधारा से जुड़ाव केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर के अंतिम छोर तक विकास और विश्वास की पहुँच।

राष्ट्रपति भवन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और अनुभव साझा

मुलाकात के दौरान बस्तर से आए विजेताओं ने राष्ट्रपति के समक्ष अपने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। 'मांदरी' और 'गौर नृत्य' की थाप से राष्ट्रपति भवन का परिसर जीवंत हो उठा।

विजेता युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए राष्ट्रपति को बताया कि किस प्रकार क्षेत्र में सड़कें बनने, मोबाइल कनेक्टिविटी पहुँचने और बुनियादी सुविधाएँ मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। कई प्रतिभागियों ने पहली बार नई दिल्ली का भ्रमण करने और देश के प्रथम नागरिक से मिलने पर अपनी अपार खुशी व्यक्त की।

एक सुरक्षित और समर्थ भारत का निर्माण

यह ऐतिहासिक मुलाकात केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट प्रतीक है कि भारत का जनजातीय और दूरस्थ अंचल अब प्रगति की रफ्तार से पीछे नहीं छूटेगा। सुरक्षा बलों के समर्पण, शासन के बुनियादी ढाँचे के विस्तार और स्थानीय आबादी के अटूट विश्वास के कारण ही बस्तर का यह परिवर्तन संभव हो पाया है। 'बस्तर पंडुम-2026' के माध्यम से उठी यह गूंज आने वाले समय में पूरे देश को शांति, सद्भाव और समावेशी विकास का एक नया रास्ता दिखाएगी।

कुमार 

सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़