विजया एकादशी पर पाएं कष्टों से मुक्ति और विजय का आशीर्वाद,पारण का समय?
दिनांक: 11 फरवरी,2026
विषय: विजया एकादशी व्रत एवं महात्म्य
आज के इस भागदौड़ भरे जीवन में हर व्यक्ति अपनी कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करना चाहता है। शास्त्रों के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी विजया एकादशी वह विशेष दिन है, जो मनुष्य को उसके शत्रुओं और बाधाओं पर विजय दिलाने की शक्ति रखती है।
प्रमुख हाइलाइट:
तिथि और महत्व: 13 फरवरी को रखा जाने वाला यह व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका विजय से पूर्व इसी व्रत को धारण किया था।
विजय का संकल्प: इस दिन विधि-विधान से पूजन करने पर पुराने रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं और व्यक्ति के यश में वृद्धि होती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त: सूर्योदय से लेकर पारण के समय तक श्रद्धापूर्वक की गई भक्ति अक्षय फल प्रदान करती है।
कैसे मनाएं विजया एकादशी?
स्वच्छता और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
पूजन: भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष दीप जलाएं और पीले फूल व फल अर्पित करें।
श्रवण: एकादशी व्रत कथा का श्रवण या वाचन अवश्य करें।
दान: सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करें।
"विजया एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के अंधकार और चुनौतियों पर विजय पाने का एक आध्यात्मिक संकल्प है।"
शुभकामनाएं:
समस्त श्रद्धालुओं को विजया एकादशी की हार्दिक मंगलकामनाएं! भगवान विष्णु आपकी झोली खुशियों और सफलता से भर दें।
विजया एकादशी 2026 पारण का समय (Vijaya Ekadashi 2026 Paran Time) द्रक पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी व्रत का पारण 14 फरवरी को सुबह 07 बजे से लेकर सुबह 09 बजकर 14 मिनट तक व्रत का पारण कर सकते हैं।
चीफ़ एडिटर: मयंक श्रीवास्तव
नारद एक्सप्रेस न्यूज