क्रिप्टो बाजार में कोहराम: $1.26 लाख से गिरकर $62,000 पर आया बिटकॉइन

क्रिप्टो बाजार में कोहराम: $1.26 लाख से गिरकर $62,000 पर आया बिटकॉइन

दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन (Bitcoin), इस समय भारी बिकवाली के दौर से गुजर रही है। पिछले साल अक्टूबर में $126,000 के अपने उच्चतम स्तर (All-time High) को छूने के बाद, इसमें अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में यह $62,000 के करीब कारोबार कर रहा है, जो इसके शिखर से लगभग 50% से अधिक की गिरावट को दर्शाता है।


बाजार में गिरावट के मुख्य कारण

क्रिप्टो मार्केट में इस अस्थिरता के पीछे कई वैश्विक और तकनीकी कारण जिम्मेदार हैं:
 * व्हेल्स की बिकवाली: बड़े निवेशक (Whales) लगातार अपने बिटकॉइन एक्सचेंजों पर ट्रांसफर कर रहे हैं। 'क्रिप्टोक्वांट' के डेटा के अनुसार, जब भी बड़े वॉलेट से एक्सचेंज पर भारी मात्रा में कॉइन आते हैं, तो यह बाजार में बढ़ती सप्लाई और संभावित गिरावट का संकेत होता है।

 * अमेरिकी व्यापार नीति में अनिश्चितता: अमेरिका में टैरिफ को लेकर मचे घमासान ने निवेशकों को डरा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% से 15% के नए ग्लोबल टैरिफ ने रिस्की एसेट्स (जैसे क्रिप्टो और इक्विटी) के प्रति आकर्षण कम कर दिया है।


 * ईथर (Ether) पर दबाव: दूसरी सबसे बड़ी करेंसी ईथर पिछले 6 महीनों में 61% तक टूट चुकी है। इसके फाउंडर विटालिक ब्यूटेरिन द्वारा अपनी होल्डिंग्स का कुछ हिस्सा बेचने की खबरों ने निवेशकों की चिंता को और गहरा कर दिया है।


वैश्विक बाजारों पर असर
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ संबंधी फैसलों को खारिज करने और फिर नए टैरिफ लागू होने से एशियाई बाजारों सहित ग्लोबल इक्विटी मार्केट दबाव में है। निवेशकों को डर है कि इन नीतियों से वैश्विक विकास दर (Global Growth) धीमी हो सकती है और मार्केट में नकदी (Liquidity) की कमी हो सकती है।
माइक्रोस्ट्रेटजी (MicroStrategy) की 'बाय द डिप' रणनीति
बाजार में छाई निराशा के बीच, बिटकॉइन की सबसे बड़ी संस्थागत होल्डर, माइक्रोस्ट्रेटजी, अभी भी अपनी खरीदारी जारी रखे हुए है:


| विवरण | डेटा |
| ताज़ा खरीदारी | 592 बिटकॉइन ($39.8 मिलियन) |
| औसत खरीद कीमत (ताज़ा) | $67,286 प्रति कॉइन |
| कुल बिटकॉइन होल्डिंग | 717,722 BTC |
| कुल निवेश मूल्य | $54.56 बिलियन |
| कुल औसत खरीद कीमत | $76,020 प्रति कॉइन |


निष्कर्ष: हालांकि माइक्रोस्ट्रेटजी जैसी कंपनियां निचले स्तरों पर खरीदारी कर रही हैं, लेकिन एक्सचेंज पर नई मांग की कमी और मैक्रो-इकोनॉमिक दबाव के कारण मार्केट का भरोसा फिलहाल कमजोर बना हुआ है।


रिपोर्टर:कंचन यादव 
नारद एक्सप्रेस न्यूज़