सहायक मत्स्य विकास अधिकारी भर्ती प्रक्रिया रद्द: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चयन सूची की खारिज, नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य विकास अधिकारी पदों की भर्ती प्रक्रिया और चयन सूची को रद्द कर दिया है। जस्टिस विभु दत्त गुरु की पीठ ने 2009 के वैधानिक भर्ती नियमों का उल्लंघन मानते हुए राज्य सरकार को नए सिरे से पारदर्शी चयन प्रक्रिया पूरी करने का कड़ा आदेश दिया है।
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के मत्स्य पालन विभाग में सहायक मत्स्य विकास अधिकारी (Assistant Fisheries Officer) के पदों पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया और उससे संबंधित पूरी चयन सूची को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह वर्ष 2009 के वैधानिक भर्ती नियमों का सख्ती से पालन करते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से पूरी चयन प्रक्रिया नए सिरे से आयोजित करे।
यह अहम फैसला न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु (Justice Bibhu Datta Guru) की एकल पीठ ने अभ्यर्थी देवेंद्र कुमार सेन और अन्य द्वारा दायर याचिका (WPS No. 7976/2025 व अन्य) पर विस्तृत सुनवाई के बाद सुनाया।
क्या था विवाद और भर्ती प्रक्रिया रद्द होने का कारण?
मामला वर्ष 2014 में शुरू हुआ था, जब विभाग ने सहायक मत्स्य विकास अधिकारी के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था:
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शुरुआती दौर और लंबी कानूनी लड़ाई: अभ्यर्थियों के आवेदनों को शुरुआत में खारिज कर दिया गया था। इसके खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिए थे कि सभी पात्र उम्मीदवारों का नए सिरे से पारदर्शी मूल्यांकन किया जाए।
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गलत तरीके से समिति का गठन: हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद विभाग ने साक्षात्कार (Interview) आयोजित किए और चयन परिणाम घोषित किए। लेकिन अभ्यर्थियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि साक्षात्कार बोर्ड का गठन ही गैर-कानूनी था।
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भर्ती नियमों का उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि 'छत्तीसगढ़ मत्स्यपालन अराजपत्रित वर्ग-III (कार्यकारी) सेवा भर्ती नियम, 2009' के शेड्यूल-IV के अनुसार चयन समिति में केवल 3 वैधानिक सदस्य (मत्स्य निदेशक - अध्यक्ष, संयुक्त निदेशक - सदस्य, और उप निदेशक - सदस्य) होने चाहिए थे। लेकिन विभाग ने नियमों में बिना संशोधन किए मनमाने तरीके से 5-सदस्यीय साक्षात्कार मंडल बना दिया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: "कानून से हटकर किया गया कार्य अवैध"
याचिकाकर्ताओं के तर्कों को सही मानते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि विभाग का यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में दिए गए अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
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सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला: न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु ने सर्वोच्च अदालत के मील के पत्थर फैसलों का संदर्भ देते हुए कहा:
"सार्वजनिक सेवा में भर्ती प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले वैधानिक नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। जब किसी कार्य को करने का तरीका कानून द्वारा तय कर दिया गया हो, तो उस कार्य को केवल उसी तरीके से किया जा सकता है, अन्यथा वह पूरी प्रक्रिया शून्य (Void) मानी जाएगी।"
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डिवीजन बेंच के निर्देशों की अनदेखी: कोर्ट ने माना कि साक्षात्कार बोर्ड का मनमाना गठन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूर्व में दिए गए हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं थी।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश
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परिणाम व चयन सूची रद्द: उच्च न्यायालय ने मत्स्य विभाग द्वारा जारी चयन सूची और साक्षात्कार के आधार पर बनाए गए परिणामों को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है।
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नियमों के तहत नए सिरे से भर्ती: अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भर्ती नियम 2009 के तहत तय 3-सदस्यीय समिति का ही गठन करें और सभी पात्र अभ्यर्थियों को शामिल करते हुए निष्पक्ष तरीके से नई चयन प्रक्रिया पूरी करें।
हाईकोर्ट के इस फैसले से जहां प्रभावित और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय की उम्मीद मिली है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर बिना नियम संशोधन के भर्ती प्रक्रियाओं में हेरफेर करने वाली कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार हुआ है।
सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़