डिजिटल क्रिएटर्स पर कसा शिकंजा: इनकम टैक्स और केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर देश के बड़े यूट्यूबर और इंस्टाग्रामर्स

आयकर विभाग और केंद्रीय एजेंसियों ने भारत के बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबरों और इंस्टाग्रामर्स के खिलाफ टैक्स चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शिकंजा कस दिया है। जानिए क्या हैं नए नियम और डिजिटल क्रिएटर्स की क्यों बढ़ रही हैं मुश्किलें।

डिजिटल क्रिएटर्स पर कसा शिकंजा: इनकम टैक्स और केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर देश के बड़े यूट्यूबर और इंस्टाग्रामर्स

भारत में डिजिटल इकोनॉमी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कल्चर के तेजी से विस्तार के साथ ही केंद्रीय कर और जांच एजेंसियों ने अपनी कमर कस ली है। देश के बड़े डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, मशहूर इंस्टाग्रामर्स और यूट्यूबर्स की आलीशान जीवनशैली, ब्रांड एंडोर्समेंट (Brand Deals), स्पॉन्सरशिप और भारी-भरकम विज्ञापनों से होने वाली आय अब आयकर विभाग (Income Tax Department) के विशेष फोकस में आ चुकी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों इसी कानूनी और वित्तीय शिकंजे की चर्चा सबसे ऊपर है।

क्यों बढ़ गई है डिजिटल क्रिएटर्स की मुश्किलें?

  • अघोषित आय और विज्ञापनों का भारी लेन-देन: देशभर के कई शीर्ष कंटेंट क्रिएटर्स और व्लॉगर्स पर यह आरोप है कि वे विज्ञापनों, पेड प्रमोशन और ब्रांड कोलेब्रेशन से मिलने वाली लाखों-करोड़ों की रकम का सही ब्योरा अपने टैक्स रिटर्न में नहीं दे रहे हैं। कई मामलों में यह भुगतान अनौपचारिक तरीकों या डिजिटल वॉलेट्स के जरिए किया जाता है, जिससे टैक्स चोरी की आशंका बढ़ जाती है।

  • नया प्रोफेशन कोड (Profession Code 16021): आयकर विभाग ने डिजिटल स्पेस की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक विशेष प्रोफेशन कोड (16021) अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत अब यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म से कमाई करने वाले हर व्यक्ति को अपनी व्यावसायिक आय को स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा।

  • टीडीएस (TDS) और गिफ्ट्स की स्क्रूटनी: उत्पाद निर्माताओं द्वारा क्रिएटर्स को भेजे जाने वाले महंगे गैजेट्स, लग्जरी ट्रिप्स, और उपहार भी टैक्स के दायरे में आते हैं। नियमों के मुताबिक, यदि कोई ब्रांड प्रचार के लिए उपहार देता है, तो उस पर भी टीडीएस और टैक्स नियमों का पालन करना अनिवार्य है, जिसकी अनदेखी कई बार क्रिएटर्स द्वारा कर दी जाती है।

कानूनी और तकनीकी निगरानी का दायरा

  • एआई (AI) और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल: आयकर विभाग अब उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर रहा है। इसके जरिए सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटी लाइफस्टाइल, महंगे विदेशी दौरों, सुपरकारों की खरीद और उनके आधिकारिक टैक्स रिटर्न के आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। खर्च और आमदनी में बड़ा अंतर पाए जाने पर स्वतः ही नोटिस जारी हो रहे हैं।

  • वर्चुअल डिजिटल स्पेस और कानूनी प्रावधान: कर कानूनों के नए प्रावधानों के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के मामलों में जांच एजेंसियों के पास डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और वर्चुअल संपत्तियों की गहन जांच के कड़े अधिकार हैं, जिससे शॉर्टकट अपनाने वाले क्रिएटर्स की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

सोशल मीडिया पर क्यों मचा है भूचाल?

इस ताबड़तोड़ कार्रवाई और नोटिसों के दौर ने डिजिटल इंडस्ट्री में हड़कंप मचा दिया है। जहां एक ओर आम जनता और पारंपरिक करदाता इसे न्यायसंगत मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई छोटे और बड़े क्रिएटर्स के बीच वित्तीय साक्षरता की कमी और महंगे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) की मदद न ले पाने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि अब डिजिटल स्पेस में 'अनियमित कमाई' का दौर खत्म हो रहा है और हर क्रिएटर को औपचारिक कॉर्पोरेट या बिजनेस प्रणाली के तहत ही काम करना होगा।

कुमार 

सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़