छत्तीसगढ़ में हीरों का खजाना! महासमुंद में मिले 5 कच्चे हीरे, बनने जा रहा है देश का नया 'डायमंड बेल्ट'
छत्तीसगढ़ के महासमुंद (बालोदा-बेलमुंडी) में NMDC को शुरुआती खोज में 5 कच्चे हीरे मिले हैं। जानिए कैसे यह क्षेत्र भारत का नया 'डायमंड बेल्ट' बनने जा रहा है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्या कहा।
महासमुंद/रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरा एक बार फिर देश और दुनिया के नक्शे पर अपनी अनमोल खनिज संपदा के लिए चमकने जा रही है। हीरा खनन और खोज के क्षेत्र में राज्य को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सराईपाली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले बालोदा-बेलमुंडी ब्लॉक में प्रारंभिक भूवैज्ञानिक अन्वेषण (Exploration) के दौरान 5 कच्चे हीरे (रफ डायमंड्स) बरामद किए गए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट आंका गया है।
इस खोज के सामने आने के बाद भारतीय भूवैज्ञानिकों और खनन विशेषज्ञों में भारी उत्साह है। प्रारंभिक भूगर्भीय रिपोर्टों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि महासमुंद का यह पूरा इलाका भारत का एक नया और विशाल 'डायमंड बेल्ट' (Diamond Belt) साबित हो सकता है, जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश के पन्ना की खदानों को भी पीछे छोड़ सकता है।
NMDC और CMDC के संयुक्त प्रयास को मिली बड़ी सफलता
यह ऐतिहासिक सफलता नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NMDC) और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) के संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) को हासिल हुई है। पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों और सैटेलाइट इमेजरी की मदद से किम्बरलाइट पाइप्स (Kimberlite Pipes - वह विशिष्ट चट्टानें जिनमें प्राकृतिक हीरे पाए जाते हैं) की खोज की जा रही थी।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, बालोदा-बेलमुंडी ब्लॉक से एकत्र किए गए मलबे और चट्टानी नमूनों की जब गहन जांच और प्रोसेसिंग की गई, तो उनमें से उच्च गुणवत्ता वाले 5 हीरों के क्रिस्टल सुरक्षित रूप से बरामद हुए। इस बेल्ट में किम्बरलाइट चट्टानों का फैलाव काफी बड़े क्षेत्र में होने के पुख्ता संकेत मिले हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि जमीन के नीचे हीरों का एक बड़ा भंडार मौजूद है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताई खुशी: "छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण"
महासमुंद में हीरे मिलने की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पर गहरा हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए एक 'गेम-चेंजर' मील का पत्थर बताया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान: "छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। महासमुंद में कच्चे हीरों की यह खोज हमारी इस समृद्धि को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगी। इस खोज से न केवल राज्य के राजस्व (Revenue) में भारी बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे। हमारी सरकार इस डायमंड बेल्ट के आगे के वैज्ञानिक खनन और विकास के लिए पूरी पारदर्शिता और गति के साथ काम करेगी।"
भारत का नया 'डायमंड हब' बनने की राह पर महासमुंद: मुख्य आकर्षण
इस भूगर्भीय खोज के कई बड़े मायने हैं, जो छत्तीसगढ़ की आर्थिक दिशा को बदल सकते हैं:
-
किम्बरलाइट इंडिकेटर मिनरल्स (KIMs): भूवैज्ञानिकों के अनुसार, क्षेत्र में गार्नेट और इल्मेनाइट जैसे सहयोगी खनिज भारी मात्रा में मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि यहाँ प्राथमिक हीरा स्रोत (Primary Diamond Sources) बहुत गहराई पर और समृद्ध अवस्था में मौजूद हैं।
-
पन्ना और किम्बरली से तुलना: विशेषज्ञों का मानना है कि इस डायमंड बेल्ट की भूगर्भीय संरचना मध्य प्रदेश के पन्ना और दक्षिण अफ्रीका के किम्बरली क्षेत्र से काफी मिलती-जुलती है।
-
राजस्व में बंपर उछाल: यदि अगले चरणों में वाणिज्यिक खनन (Commercial Mining) शुरू होता है, तो छत्तीसगढ़ देश का दूसरा सबसे बड़ा हीरा उत्पादक राज्य बन सकता है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
आगामी रणनीति: शुरू होगा 'हाई-रेजोल्यूशन' सर्वे
NMDC और CMDC के आला अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती सफलता के बाद अब इस पूरे ब्लॉक में बड़े पैमाने पर 'डेंस कोर ड्रिलिंग' और 'हाई-रेजोल्यूशन एयरो-मैग्नेटिक सर्वे' (Aero-magnetic Survey) कराने की तैयारी की जा रही है। इससे यह सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा कि इस खदान में कुल कितने मिलियन कैरेट हीरों का भंडार छिपा है। सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन ने संबंधित सर्वे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है ताकि अनाधिकृत प्रवेश या अवैध उत्खनन को रोका जा सके।
निश्चित रूप से, धान के कटोरे के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ अब हीरों की चमक से दुनिया को चकाचौंध करने के लिए पूरी तरह तैयार है। महासमुंद की इस खोज ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है।
कंचन यादव
सह सम्पादक / नारद एक्सप्रेस न्यूज़