रायपुर: नकटी गांव में चला प्रशासन का बुलडोजर, भारी सुरक्षा के बीच निर्माण ध्वस्त

रायपुर: नकटी गांव में चला प्रशासन का बुलडोजर, भारी सुरक्षा के बीच निर्माण ध्वस्त

रायपुर। राजधानी से सटे नकटी गांव में प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे पर की गई बड़ी कार्रवाई के बाद एक हृदय विदारक नजारा देखने को मिला। नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गांव के कच्चे-पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान जहां ग्रामीणों का गुस्सा और दर्द फूट पड़ा, वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए मुस्तैद नजर आया।

छावनी में बदला गांव, बैरिकेडिंग कर बाहरी लोगों पर रोक

कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए प्रशासन ने गांव को पूरी तरह छावनी में बदल दिया था। गांव से तीन किलोमीटर पहले ही पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया था।

  • सुरक्षा घेरा: बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और ग्रामीणों के बाहर जाने पर अस्थाई पाबंदी रही, जिससे राहगीरों को भी थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।

  • बुलडोजर की कार्रवाई: सूर्योदय के साथ ही प्रशासनिक अमला बुलडोजर लेकर पहुंचा। हालांकि, ग्रामीणों ने "पहले हम पर बुलडोजर चलाओ" के नारे लगाते हुए कड़ा विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन महिला व पुरुष पुलिस बल ने उन्हें मौके से हटाकर कार्रवाई जारी रखी।

विस्थापन और ग्रामीणों की चिंताएं

प्रशासन द्वारा बेघर हुए लोगों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट आवंटित किए जा रहे हैं। मौके पर मौजूद नगर निगम की मालवाहक गाड़ियों के जरिए पीड़ितों के सामान और मवेशियों को शिफ्ट किया गया। इसके बावजूद ग्रामीणों में भारी असंतोष देखा गया:

  • बड़ा परिवार, छोटा फ्लैट: ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जो फ्लैट दे रही है, वह उनके बड़े परिवारों के लिए बहुत छोटा है।

  • नेताओं के आश्वासन पर उठे सवाल: पीड़ितों ने रूंधे गले से बताया कि वे सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भी मिले थे, जिन्होंने 4 महीने तक कार्रवाई न होने का आश्वासन दिया था, लेकिन प्रशासन ने 4 दिन भी इंतजार नहीं किया।

गलती से टूटा एक अन्य मकान कार्रवाई के दौरान सूची में शामिल मकानों को ही ढहाया जाना था। लेकिन इस बीच 'टिकेश्वरी' नामक युवती का मकान भी ढहा दिया गया, जिसका नाम सूची में नहीं था। हालांकि, प्रशासन ने गलती स्वीकारते हुए उसे भी फ्लैट देने का आश्वासन दिया है।

पथराव और प्रशासनिक संयम

कार्रवाई के दौरान माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया जब आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। राहत की बात यह रही कि पुलिस ने कोई जवाबी हिंसक कार्रवाई नहीं की और हेलमेट व बॉडी प्रोटेक्टर के जरिए खुद का बचाव करते हुए शांति बनाए रखी।

  • अस्थाई जेल: सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों (जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं) को हिरासत में लेकर अस्थाई जेल में रखा गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

  • अधिकारियों की अपील: अधिकारी लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार ग्रामीणों को समझाते रहे कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।

आंसुओं के बीच खुले आसमान के नीचे रात काटने की मजबूरी

मकान टूटने के डर से ग्रामीण पिछले दो दिनों से सो नहीं पाए थे। सबकुछ खत्म होने के बाद अब उनकी आंखों के आंसू भी सूख चुके हैं। जब बेघर हुए ग्रामीणों से उनके आशियाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने रुआंसे मन से कहा, "अब कहां जाएंगे, बिखरा हुआ सामान समेटना है, आज की रात इसी मलबे के पास खुले आसमान के नीचे काटेंगे।"

मयंक श्रीवास्तव /नारद एक्स्प्रेस न्यूज