वनांचल से रोबोटिक्स लैब तक: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 'स्पार्क', एआई आधारित तकनीक सीखकर देश में परचम लहरा रहे हैं ग्रामीण छात्र
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 'स्पार्क' अभियान से आई डिजिटल क्रांति! जशपुर से दंतेवाड़ा तक के ग्रामीण छात्र अब महंगे प्राइवेट स्कूलों को छोड़ सरकारी लैब्स में खुद सीख रहे हैं एआई (AI) और रोबोटिक्स कोडिंग। जानिए कैसे बदल रही है वनांचल की तस्वीर।
नवा रायपुर / बिलासपुर: छत्तीसगढ़ का नाम आते ही कभी जेहन में भौगोलिक चुनौतियां और बुनियादी सुविधाओं का संघर्ष सामने आता था, लेकिन आज का छत्तीसगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है। राज्य के सरकारी स्कूलों में शुरू हुआ 'स्पार्क' (Innovation in Education) अभियान ग्रामीण और आदिवासी पृष्ठभूमि के बच्चों की तकदीर बदल रहा है। अब जशपुर, सरगुजा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों के बच्चे न सिर्फ निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
किताबों से आगे: कोडिंग और एआई का नया दौर
राज्य के स्वामी आत्मानंद और 'पीएम श्री' उत्कृष्ट विद्यालयों में अब शैक्षणिक तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह अब स्मार्ट क्लासरूम और हाई-टेक कंप्यूटर लैब्स ने ले ली है।
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जमीनी स्तर पर बदलाव: कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों को 'स्पार्क' पहल के तहत कोडिंग, रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है।
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राष्ट्रीय मंच पर धमक: हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों से आए छात्रों के एआई आधारित कृषि मॉडल्स को देशभर के वैज्ञानिकों ने सराहा है।
खेतों की पगडंडियों से साइंस लैब तक
"हमारे स्कूल में जब पहली बार रोबोटिक्स किट आई, तो हमें लगा यह बहुत मुश्किल होगा। लेकिन शिक्षकों के मार्गदर्शन और स्पार्क टूलकैट की मदद से हमारी टीम ने एक ऐसा सेंसर बनाया है जो खेतों में नमी देखकर खुद-ब-खुद सिंचाई सिस्टम चालू कर देता है।" — तुषार नेताम, छात्र (कक्षा 10वीं, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, कांकेर)
इस नवाचार की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें शामिल होने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण परिवेश से आते हैं, जिनके माता-पिता खेती-किसानी या स्थानीय रोजगार से जुड़े हैं। वनांचल की प्रतिभाएं अब आधुनिकतम तकनीक को आत्मसात कर रही हैं।
शिक्षकों की विशेष ट्रेनिंग और सस्टेनेबल मॉडल
इस शैक्षिक सुधार को सफल बनाने के लिए राज्य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। शिक्षकों को 'इनोवेशन मेंटर्स' के रूप में तैयार किया गया है, ताकि वे रटने की पुरानी पद्धति को खत्म कर बच्चों में 'प्रॉब्लम सॉल्विंग' (समस्या सुलझाने) की क्षमता विकसित कर सकें।
नारद एक्सप्रेस व्यू: क्यों खास है यह 'स्पार्क'?
महानगरों के महंगे स्कूलों में रोबोटिक्स और कोडिंग सिखाना आम बात है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में निःशुल्क और विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा मिलना सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। डिजिटल साक्षरता की यह चिंगारी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को देश का प्रमुख 'नॉलेज और टेक हब' बनाने की क्षमता रखती है।
कंचन यादव
सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़