बैंकिंग सेक्टर के 'संकटमोचक' राजीव कुमार बने HDFC बैंक के नए पार्ट-टाइम चेयरमैन, 30 जून से संभालेंगे कमान

देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता HDFC बैंक ने पूर्व वित्त सचिव और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को अपना नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया है। जानिए बैंकिंग सुधारों के प्रणेता रहे राजीव कुमार की नियुक्ति से बैंक को क्या फायदे होंगे और क्या है पूरा मामला।

बैंकिंग सेक्टर के 'संकटमोचक' राजीव कुमार बने HDFC बैंक के नए पार्ट-टाइम चेयरमैन, 30 जून से संभालेंगे कमान

मुंबई / नवा रायपुर: भारत के बैंकिंग और कॉरपोरेट जगत से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, HDFC बैंक के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने देश के पूर्व वित्त सचिव और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार को बैंक का नया पार्ट-टाइम चेयरमैन (अंशकालिक अध्यक्ष) और एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक) नियुक्त कर दिया है। यह नियुक्ति आज यानी 30 जून 2026 से प्रभावी हो गई है।

एचडीएफसी बैंक द्वारा शेयर बाजारों को दी गई आधिकारिक सूचना के अनुसार, राजीव कुमार को चार वर्षों के लिए स्वतंत्र निदेशक के रूप में बोर्ड में शामिल किया गया है, जबकि पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और शेयरधारकों की अंतिम मंजूरी के अधीन है।

क्यों खास है राजीव कुमार का चयन? (बैंकिंग सुधारों के प्रणेता)

66 वर्षीय राजीव कुमार वर्ष 1984 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। उन्हें भारतीय वित्तीय प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों का एक लंबा और बेहद सफल अनुभव है:

  • सरकारी बैंकों का विलय: वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव (2017-2020) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के 27 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को आपस में विलय करके 12 बड़े और मजबूत बैंकों में समेकित करने के ऐतिहासिक फैसले का नेतृत्व किया था।

  • 4R स्ट्रेटेजी से बैंकों का कायाकल्प: जब देश के सरकारी बैंक एनपीए (NPA/बढ़ते कर्ज) के बोझ तले दबे थे, तब राजीव कुमार ने 'Recognition, Resolution, Recapitalisation, and Reforms' (4R) की रणनीति लागू की थी। उनके कार्यकाल में सरकारी बैंकों में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश (Recapitalisation) किया गया, जिससे बैंक वापस मुनाफे में आ गए।

  • शेल कंपनियों पर सर्जिकल स्ट्राइक: पद संभालने के महज कुछ ही हफ्तों के भीतर उन्होंने अवैध वित्तीय लेनदेन करने वाली करीब 3.38 लाख फर्जी (शेल) कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करवा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने फर्जी पोंजी स्कीमों पर लगाम लगाने के लिए 2019 का सख्त कानून भी बनवाया था।

  • लोकसभा चुनाव 2024 का सफल संचालन: वित्त सचिव के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के रूप में देश के ऐतिहासिक और विश्व के सबसे बड़े 2024 के लोकसभा चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन किया था।

अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ इंतजार

HDFC बैंक पिछले कुछ महीनों से एक स्थायी और मजबूत नेतृत्व की तलाश में था। यह पद तब खाली हुआ था जब पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने बैंक की कुछ आंतरिक कार्यप्रणालियों पर नैतिक असहमति जताते हुए अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनके जाने के बाद, बाजार और निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए एचडीएफसी ग्रुप के दिग्गज केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन बनाया गया था।

राजीव कुमार की नियुक्ति से ठीक एक दिन पहले, बाहरी कानूनी फर्मों (Wilson Sonsini Goodrich & Rosati और Wadia Ghandy & Co) की एक स्वतंत्र समीक्षा रिपोर्ट में बैंक को पूर्व चेयरमैन द्वारा उठाए गए नीतिगत मुद्दों पर पूरी तरह से क्लीन चिट मिल गई है, जिसके बाद बोर्ड ने तुरंत राजीव कुमार के नाम पर मुहर लगा दी।

नारद एक्सप्रेस व्यू: एचडीएफसी बैंक के लिए नए युग की शुरुआत

एचडीएफसी बैंक इस समय न केवल देश का सबसे बड़ा निजी बैंक है, बल्कि इसकी बाजार हिस्सेदारी और साख भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब बैंक अपनी कॉरपोरेट गवर्नेंस (कॉरपोरेट सुशासन) को और मजबूत करना चाहता है, राजीव कुमार जैसे कड़े और निष्पक्ष वित्तीय प्रशासक का बोर्ड के शीर्ष पर आना निवेशकों के विश्वास को दोगुना करेगा।

आने वाले दिनों में बैंक के वर्तमान एमडी और सीईओ (MD & CEO) शशिधर जगदीशन के कार्यकाल के विस्तार की प्रक्रिया भी होनी है, ऐसे में राजीव कुमार की रणनीतिक देखरेख बैंक को एक नई और सुरक्षित ऊंचाई पर ले जा सकती है।

कंचन यादव 

सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़