NEET-UG पेपर लीक मामला: CBI की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां, अब डिजिटल लिंक और टेलीग्राम नेटवर्क पर 'फॉरेंसिक' वार
NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां जारी। टेलीग्राम और डिजिटल लिंक्स की जांच तेज, आरोपियों की हिरासत बढ़ी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
नई दिल्ली / रायपुर: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। देश के विभिन्न राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद अब तक कई मुख्य आरोपियों को दबोचा जा चुका है। दिल्ली की विशेष अदालत ने मुख्य साजिशकर्ताओं समेत 10 से अधिक संदिग्धों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है, जिससे साफ है कि जांच एजेंसियां इस बार किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।
देशव्यापी एक्शन: कड़ियों से कड़ियां जोड़ती सीबीआई
सीबीआई ने इस रैकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों में जाल बिछाया है। इस संगठित नेटवर्क में शामिल कई बड़े चेहरों को गिरफ्तार किया गया है:
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महाराष्ट्र और बिहार लिंक: पुणे, नासिक और पटना से जुड़े संदिग्धों पर शिकंजा कसा गया है। मनीषा वाघमारे, मनीषा हवलदार और शुभम खैरनार जैसे संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। इन पर आरोप है कि इन्होंने स्पेशल 'गेस' पेपर और चुनिंदा कोचिंग सेंटर्स के जरिए छात्रों और उनके अभिभावकों को इस सिंडिकेट से जोड़ा।
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मास्टरमाइंड नेटवर्क: मुख्य साजिशकर्ताओं के तौर पर पी.वी. कुलकर्णी और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर जैसे नाम सामने आए हैं, जो कोचिंग हब के समानांतर पूरा नेटवर्क चला रहे थे।
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राजस्थान और हरियाणा कनेक्शन: जयपुर से मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और गुरुग्राम से यश यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जिससे इस लीक के अंतर-राज्यीय (Inter-State) कनेक्शन की पुष्टि होती है।
टेलीग्राम और डिजिटल ट्रेल: टेक्निकल फॉरेंसिक जांच पर फोकस
जांच का एक बड़ा हिस्सा टेलीग्राम (Telegram) और अन्य एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर केंद्रित है। सीबीआई की फॉरेंसिक और साइबर विंग इन डिजिटल कड़ियों को जोड़ने में जुटी है:
डाटा रिकवरी और डिजिटल सबूत: आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। व्हाट्सएप ग्रुप्स और टेलीग्राम चैनल्स के डिलीट किए गए डेटा और चैट्स को रिकवर करने के लिए अत्याधुनिक फॉरेंसिक टूल्स की मदद ली जा रही है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि पेपर लीक के बाद 'गेस' पेपर्स और हल किए गए उत्तरों को सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स के जरिए बहुत तेजी से एक राज्य से दूसरे राज्य में सर्कुलेट किया गया था। सीबीआई इस बात का भी तकनीकी ऑडिट कर रही है कि क्या संवेदनशील परीक्षा सर्वर, ई-मेल कड़ियों या डिजिटल प्रिंटिंग प्रेस के स्तर पर कोई तकनीकी सेंधमारी हुई थी।
नए एंटी-पेपर लीक कानून के तहत सख्त कार्रवाई
केंद्र सरकार द्वारा जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने देशव्यापी स्तर पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। इस मामले में आरोपियों पर नए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की सख्त धाराओं के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सबूत नष्ट करने और विश्वासघात के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
एजेंसी का स्पष्ट कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति या सेंटर का काम नहीं, बल्कि देशव्यापी स्तर पर फैला एक संगठित अपराध (Organized Crime) है। जैसे-जैसे डिजिटल लिंक और हवाला के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं, आने वाले दिनों में कुछ और बड़े प्रशासनिक और रसूखदार नामों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
कंचन यादव
सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़