सावधान! 'बॉस ZIP फ्रॉड' से रहें सतर्क, साइबर ठगों ने छत्तीसगढ़ में उड़ाए ₹791 करोड़
रायपुर। साइबर अपराधियों ने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाने के लिए एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है, जिसे ‘बॉस ZIP फ्रॉड’ (Boss ZIP Fraud) या CEO इम्पर्सनेशन स्कैम कहा जा रहा है। इस नए ट्रेंड को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और साइबर एक्सपर्ट्स ने देशव्यापी अलर्ट जारी किया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस तरह की अलग-अलग साइबर ठगी के जरिए पिछले 30 महीनों में अकेले छत्तीसगढ़ में 791 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ठगी जा चुकी है।
कैसे जाल में फंसाते हैं साइबर अपराधी?
इस स्कैम में ठग किसी कंपनी के बड़े अधिकारी (जैसे CEO या डायरेक्टर) का फर्जी प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप या ई-मेल पर मैसेज भेजते हैं।
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जल्दबाजी का दबाव: अपराधी कर्मचारियों पर काम को तुरंत पूरा करने का दबाव बनाते हैं।
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संदिग्ध फाइलें: मैसेज के साथ एक ZIP फाइल भेजी जाती है। इसे "सिक्योरिटी अपडेट" या "जरूरी दस्तावेज" बताकर खोलने को कहा जाता है।
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मोबाइल का रिमोट कंट्रोल: इस ZIP फाइल के अंदर छिपी EXE या DLL फाइल जैसे ही डाउनलोड होती है, कर्मचारी का मोबाइल फोन हैक हो जाता है। ठग फोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लेकर बैंकिंग ऐप्स, ओटीपी (OTP) और अन्य निजी डेटा तक पहुंच बना लेते हैं।
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नंबर बदलना: कई मामलों में मोबाइल हैक करने के बाद ठग असली बॉस का नंबर हटाकर अपना नंबर सेव कर देते हैं, जिससे कर्मचारी को भनक भी नहीं लगती कि वह किसी जालसाज से बात कर रहा है। इसके बाद फर्जी आदेश जारी कर कंपनी के पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं।
रायपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स गिरफ्तार
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच रायपुर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स (फर्जी बैंक खाताधारक) को गिरफ्तार किया है, जिनके खातों के जरिए देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया था।
इसके अलावा, पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर गिरोह का भी भंडाफोड़ किया है, जो रायपुर से बैठकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था। इस गिरोह ने पिछले दो सालों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की थी। फिलहाल पुलिस अपराधियों के बैंक खातों को फ्रीज कर पीड़ितों की रकम वापस दिलाने का प्रयास कर रही है।
साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह: सुरक्षा के अचूक उपाय
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आधुनिक अपराधों से बचने का एकमात्र और सबसे बड़ा जरिया 'जागरूकता' ही है। उन्होंने निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
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क्रॉस-वेरिफिकेशन है जरूरी: यदि आपके किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से कोई संदिग्ध मैसेज या फाइल आए, तो तुरंत कदम न उठाएं। पहले फोन कॉल, वीडियो कॉल या व्यक्तिगत रूप से मिलकर इसकी पुष्टि करें।
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अनजान फाइलों से दूरी: किसी भी अनजान या संदिग्ध ZIP, EXE या DLL फाइल को डाउनलोड या ओपन बिल्कुल न करें।
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सुरक्षा फीचर्स का उपयोग: अपने व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन (Two-Step Verification) हमेशा एक्टिव रखें।
महत्वपूर्ण सूचना: यदि आप या आपके आसपास का कोई व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना देरी किए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल (
) पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। समय पर दी गई सूचना से पैसे ब्लॉक होने की संभावना बढ़ जाती है। cybercrime.gov.in कंचन यादव/नारद एक्स्प्रेस न्यूज