दिल्ली में सियासी हलचल: राष्ट्रपति मुर्मू से मिले अमित शाह, मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज

दिल्ली में बढ़ी सियासी सरगर्मी! पीएम मोदी के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने की राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात। क्या होने जा रहा है मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल? जानिए जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और यूपी-दिल्ली में संगठनात्मक बदलावों के बीच इस कैबिनेट विस्तार की पूरी इनसाइड स्टोरी।

दिल्ली में सियासी हलचल: राष्ट्रपति मुर्मू से मिले अमित शाह, मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज

नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस समय भारी सियासी हलचल देखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है। राष्ट्रपति कार्यालय (Rashtrapati Bhavan) द्वारा सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर इस मुलाकात की आधिकारिक तस्वीर साझा किए जाने के बाद से ही मोदी मंत्रिमंडल (Union Council of Ministers) में एक बड़े और व्यापक फेरबदल (Cabinet Reshuffle) की अटकलें देश भर में बेहद तेज हो गई हैं।

राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी 29 या 30 जून को केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को जगह दी जा सकती है, वहीं कुछ वर्तमान मंत्रियों के विभागों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

बैक-टू-बैक मुलाकातों ने गर्म किया राजनीतिक बाजार

इस पूरी हलचल की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। अमित शाह की इस मुलाकात से ठीक दो दिन पहले, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लंबी मुलाकात की थी। हालांकि, प्रधानमंत्री की इस मुलाकात को उनकी हालिया विदेश यात्रा के बाद की एक औपचारिक ब्रीफिंग बताया गया था, लेकिन उसके तुरंत बाद गृह मंत्री अमित शाह का राष्ट्रपति भवन पहुंचना यह साफ संकेत दे रहा है कि सरकार के शीर्ष स्तर पर कुछ बड़ा और नीतिगत निर्णय लिया जा चुका है।

इन 4 बड़े घटनाक्रमों से मिले कैबिनेट फेरबदल के पुख्ता संकेत:

  • 1. केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा: केरल से आने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था। भाजपा द्वारा उन्हें दोबारा उच्च सदन (Rajya Sabha) न भेजे जाने के बाद उन्होंने मंत्रिपरिषद से अपना इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है। उनके जाने के बाद मंत्रिमंडल में एक प्रमुख अल्पसंख्यक चेहरा शामिल किए जाने की संभावना है।

  • 2. रवनीत सिंह बिट्टू की स्थिति पर सस्पेंस: जॉर्ज कुरियन के साथ ही रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का भी राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को खत्म हो गया और उन्हें भी दोबारा नामांकित नहीं किया गया। हालांकि, बिट्टू ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है, जिससे उनके विभाग या राजनीतिक भविष्य को लेकर संशय और चर्चाएं दोनों बनी हुई हैं।

  • 3. संगठन और सरकार में संतुलन की तैयारी: सरकार के कुछ मंत्रियों को उनके गृह राज्यों में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। ऐसे में 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत कुछ मंत्रियों को कैबिनेट से मुक्त कर संगठन में भेजा जा सकता है।

  • 4. सहयोगी दलों का बढ़ता ग्राफ: हालिया दिनों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 बागी सांसदों और शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के एनडीए (NDA) खेमे में शामिल होने या समर्थन देने की अटकलें हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अंतिम फैसले के बाद इन नए सहयोगियों को भी कैबिनेट विस्तार में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।

2027 के विधानसभा चुनावों पर टिकी है नजर

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी इस फेरबदल के जरिए आगामी उत्तर प्रदेश (2027) और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी सोशल इंजीनियरिंग और राजनैतिक समीकरणों को दुरुस्त करना चाहती है। बीते गुरुवार को ही भाजपा ने उत्तर प्रदेश इकाई में युवा और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के चेहरों को तरजीह देते हुए बड़ा बदलाव किया है, और माना जा रहा है कि केंद्रीय कैबिनेट में भी इसी तरह का क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन देखने को मिलेगा।

फिलहाल, पीएमओ या सरकार की तरफ से किसी भी फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दिल्ली में बैठकों का जो दौर जारी है, उसने यह साफ कर दिया है कि मोदी सरकार 3.0 के इस कार्यकाल में इस महीने के अंत तक एक नई और बदली हुई कैबिनेट देश के सामने आ सकती है।

कंचन यादव

सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़