रायपुर में एनालाग पनीर का अवैध कारोबार हावी: 1.87 करोड़ की मशीनें खा रहीं धूल, 6 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका डेयरी कॉलेज का प्रोसेसिंग प्लांट
रायपुर। राज्य शासन द्वारा सेहत के लिए हानिकारक 'एनालाग पनीर' (नकली/कृत्रिम पनीर) के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद राजधानी रायपुर में इसका अवैध कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। शहर की कई डेयरियों और खाद्य प्रतिष्ठानों में बड़े पैमाने पर मिलावटी व नकली पनीर तैयार कर बेचे जाने की गंभीर शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने और दुग्ध उत्पादों की शुद्धता जांचने का मुख्य दायित्व संभालने वाला रायपुर का एकमात्र डेयरी टेक्नोलॉजी कॉलेज स्वयं प्रशासनिक बदहाली और उपेक्षा का शिकार है।
1.87 करोड़ की मशीनें वर्षों से धूल फांकने को मजबूर
कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित डेयरी कॉलेज में दुग्ध प्रसंस्करन और गुणवत्ता जांच हेतु 3,000 वर्गफीट में आधुनिक डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई है। इसके लिए वर्ष 2017-18 में स्वीकृति मिली थी और वर्ष 2020 से पूर्व ही 1 करोड़ 87 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक मशीनें खरीद ली गई थीं।
यह प्लांट वर्ष 2020 में ही प्रारंभ हो जाना था, परंतु महज छोटी-मोटी तकनीकी कमियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण वर्ष 2026 में भी यह चालू नहीं हो सका है। छह वर्षों से करोड़ों की मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे शासकीय धन का भी नुकसान हो रहा है।
विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित, जांच ठप होने से मिलावटखोर बेखौफ
प्रैक्टिकल यूनिट शुरू न होने से डेयरी कॉलेज के छात्र-छात्राओं का अध्ययन व व्यावहारिक प्रशिक्षण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल और मिल्क प्रोसेसिंग सीखने के लिए निजी डेयरी फार्मों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
दूसरी ओर, कॉलेज परिसर में दुग्ध उत्पादों की नियमित सैंपलिंग और टेस्टिंग (गुणवत्ता परीक्षण) बंद होने के कारण शहर में नकली व मिलावटी दूध-पनीर बेचने वाले अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
अगस्त के अंत तक शुरू होगा प्लांट: डीन
मामले में डेयरी कॉलेज, रायपुर के डीन डॉ. सुधीर उपरित ने बताया कि बंद पड़ी सुविधाओं को जल्द दुरुस्त किया जा रहा है:
"डेयरी उत्पादों की जांच की सुविधा जो बाधित थी, उसे आगामी सप्ताहभर के भीतर पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट का 98 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष बचे छोटे-मोटे तकनीकी कार्यों को तेजी से निपटाकर इसे अगस्त के अंत तक शुरू करने की तैयारी चल रही है। प्लांट के क्रियान्वयन से विद्यार्थियों को दूध प्रसंस्करण, पैकेजिंग और गुणवत्ता परीक्षण का बेहतर व्यावहारिक ज्ञान मिल सकेगा।"
निष्कर्ष:
यदि प्रशासन समय रहते इस प्रोसेसिंग व टेस्टिंग यूनिट को पूरी क्षमता से शुरू कर देता है, तो न केवल विद्यार्थियों का भविष्य संवरेगा, बल्कि रायपुर शहरवासियों को भी मिलावटी व खतरनाक एनालाग पनीर से मुक्ति मिल सकेगी।
संपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज