फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र मामला: छत्तीसगढ़ के 186 अधिकारी-कर्मचारी मेडिकल बोर्ड के घेरे में
रायपुर: छत्तीसगढ़ में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी पाने के गंभीर आरोपों पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए रायपुर में एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो आरोपी 186 अधिकारी-कर्मचारियों की दिव्यांगता का पुनः परीक्षण (फिजिकल-मेडिकल वेरिफिकेशन) कर रिपोर्ट सौंपेगा। यह फैसला स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की संयुक्त बैठक में लिया गया।
प्रमुख बिंदु:
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जांच का दायरा: शिकायतों के आधार पर कुल 186 अधिकारी और कर्मचारी विशेष मेडिकल बोर्ड की जांच का सामना करेंगे।
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समयबद्ध प्रक्रिया: सरकार का लक्ष्य पूरी मेडिकल जांच और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना है।
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सख्त कार्रवाई के संकेत: बोर्ड की रिपोर्ट में प्रमाणपत्र फर्जी या नियमों के विपरीत पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
जांच के दायरे में आए प्रमुख पद:
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प्रशासनिक अधिकारी: CGPSC से चयनित 7 डिप्टी कलेक्टर, 3 नायब तहसीलदार और प्रभारी जनपद CEO.
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विभागीय अधिकारी: 3 लेखाधिकारी, 3 पशु चिकित्सक, 2 सहकारिता निरीक्षक और 13 उपअभियंता (Sub-Engineers).
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शिक्षा व कृषि क्षेत्र: 65 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, व्याख्याता, शिक्षक और 24 ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी।
क्यों उठानी पड़ी कार्रवाई? छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ की ओर से लंबे समय से ज्ञापन और शिकायतें सौंपी जा रही थीं कि कुछ लोगों ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर आरक्षण का अनुचित लाभ उठाया है। कई मामले कोर्ट में भी लंबित हैं। समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक के बाद पारदर्शिता और वास्तविक पात्रों के अधिकार सुरक्षित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
संपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज