तिल्दा के आसौंदा में वन विभाग की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई; 500 ट्रैक्टर अवैध लकड़ी और कोयला भट्टे सील, उच्च स्तरीय जांच की मांग

तिल्दा के आसौंदा में वन विभाग की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई; 500 ट्रैक्टर अवैध लकड़ी और कोयला भट्टे सील, उच्च स्तरीय जांच की मांग

रायपुर (तिल्दा खरोरा)। रायपुर जिले के तिल्दा जनपद अंतर्गत ग्राम आसौंदा में वन विभाग और उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। ग्रामीणों की लगातार मिल रही शिकायतों और जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती दुलारी सुरेंद्र वर्मा द्वारा इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद, प्रशासन ने यह बड़ी संयुक्त कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के 'सुशासन तिहार' और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 की तत्परता के चलते ग्रामीणों की इस शिकायत पर वन अमले ने तत्काल संज्ञान लिया, जिसके परिणाम स्वरूप क्षेत्र में चल रहे अवैध कारोबार का एक बड़ा भंडाफोड़ हुआ है।

500 ट्रैक्टर लकड़ी और अवैध कोयला भट्टे जब्त

आसौंदा के शीतला मंदिर क्षेत्र, नर्सरी परिसर सहित विभिन्न चिन्हित स्थानों पर दी गई दबिश के दौरान भारी मात्रा में अवैध लकड़ी और कोयला बरामद किया गया है। अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, जब्त की गई लकड़ी की मात्रा लगभग 500 ट्रैक्टर आंकी जा रही है। बरामद लकड़ियों में अर्जुन (कहुआ), नीम, इमली, बहेड़ा, करही और कसही जैसी महत्वपूर्ण और प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं।

इसके साथ ही, क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित M/s Chandrakar Traders एवं M/s KGN Coal Depot से संबंधित दो बड़े कोयला भट्टों पर भी विभागीय गाज गिरी है, जिन्हें मौके पर ही सील कर दिया गया है।

सरपंच का नाम आया सामने, निष्पक्ष जांच की मांग

विभागीय जांच और पूछताछ के दौरान इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे ग्राम आसौंदा के वर्तमान सरपंच जितेंद्र चंद्राकर का नाम मुख्य रूप से सामने आ रहा है। विभिन्न स्थानों पर डंप कर रखी गई लकड़ी के स्वामित्व को लेकर उनके द्वारा अपने परिवार के सदस्यों और अन्य करीबियों के नामों का उल्लेख किए जाने की जानकारी मिली है।

इस संवेदनशील मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी सुरेंद्र वर्मा ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीणों की यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं है, बल्कि वन संपदा की चोरी और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के खिलाफ है। उन्होंने इस पूरे सिंडिकेट के पर्दाफाश के लिए शासन-प्रशासन से एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय संयुक्त जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ता को मिली धमकी, पुलिस में मामला दर्ज

इस ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र के भू-माफियाओं और अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। मामले को उजागर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र वर्मा को इस कार्रवाई के दौरान सार्वजनिक रूप से गंभीर धमकियां भी दी गईं। श्री वर्मा ने इसकी लिखित सूचना तत्काल संबंधित थाने में दर्ज करा दी है और प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मुख्य मांगें:

  • पर्यावरणीय स्वीकृतियों (Environmental Clearances) की समीक्षा: क्या इन व्यवसायों के पास नियमानुसार आवश्यक अनुमतियां थीं, इसकी गहन जांच हो।

  • शासकीय भूमि के अवैध उपयोग पर रोक: बिना वैध लीज के सरकारी जमीनों पर चल रहे इस कारोबार को पूरी तरह बंद किया जाए।

  • लाइसेंस निरस्तीकरण: जांच में अनियमितता और अवैध संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित फर्मों के सभी लाइसेंस और स्वीकृतियां तुरंत निरस्त की जाएं।

  • संयुक्त जांच दल का गठन: वन विभाग, राजस्व विभाग और पर्यावरण बोर्ड की एक संयुक्त टीम बनाकर लकड़ी के वास्तविक स्रोतों और इसके वित्तीय लाभार्थियों की पारदर्शी जांच की जाए।

ग्रामीणों और जागरूक जनप्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि साय सरकार के सुशासन के संकल्प के तहत इस मामले में शामिल सभी रसूखदारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी और तिल्दा क्षेत्र की वन संपदा व पर्यावरण को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा।

हेमंत देवांगन/संपादक  

नारद एक्स्प्रेस न्यूज