रायपुर-दुर्ग में साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस का 'मेगा ड्राइव': 'डिजिटल अरेस्ट' और 'वर्क फ्रॉम होम' स्कैमर्स पर शिकंजा, सैकड़ों संदिग्ध खाते फ्रीज
रायपुर और दुर्ग-भिलाई में साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस की मेगा ड्राइव। डिजिटल अरेस्ट और जॉब स्कैम से रहें सावधान, साइबर सेल ने जारी की एडवाइजरी।
रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दो सबसे बड़े शहरी केंद्रों— राजधानी रायपुर और दुर्ग-भिलाई में पैर पसार रहे साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। हाल के दिनों में 'डिजिटल अरेस्ट' और 'वर्क फ्रॉम होम' (घर बैठे कमाई) के नाम पर हुई करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल ने एक 'मेगा ड्राइव' (विशेष अभियान) शुरू किया है। इस अभियान के तहत न सिर्फ अपराधियों की धरपकड़ की जा रही है, बल्कि ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध बैंक खातों को भी तेजी से फ्रीज कराया जा रहा है।
सुंदर नगर, पंडरी और भिलाई के इलाके निशाने पर
मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में रायपुर के सुंदर नगर, पंडरी, समता कॉलोनी और दुर्ग-भिलाई के पॉश व व्यापारिक इलाकों से साइबर फ्रॉड की कई बड़ी शिकायतें सामने आई हैं। ठगों ने पढ़े-लिखे युवाओं, गृहणियों और रिटायर्ड अधिकारियों को अपना शिकार बनाया है। शिकायतों का अंबार लगने के बाद आईजी और एसपी के निर्देश पर साइबर सेल की कई टीमों को एक्टिव किया गया है, जो इन इलाकों में तकनीकी सर्विलांस और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' और 'जॉब स्कैम' का ट्रेंड?
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आजकल ठग दो तरीकों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं:
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डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): इसमें ठग खुद को सीबीआई (CBI), ईडी (ED), ट्राई (TRAI) या दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल करते हैं। उन्हें डराया जाता है कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है या उनके खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। केस से नाम हटाने के बदले कैमरे के सामने ही घंटों 'डिजिटल कस्टडी' में रखकर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।
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वर्क फ्रॉम होम स्कैम (Work From Home Scam): यूट्यूब वीडियो लाइक करने, गूगल रिव्यू देने या पार्ट-टाइम कोडिंग/डाटा एंट्री के नाम पर टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए लोगों को जोड़ा जाता है। शुरुआत में कुछ सौ रुपये का मुनाफा दिखाकर बाद में 'टास्क' पूरा करने के नाम पर लाखों रुपये निवेश करा लिए जाते हैं और फिर ठग गायब हो जाते हैं।
सैकड़ों बैंक खाते रडार पर, फ्रीजिंग की कार्रवाई तेज
इस मेगा ड्राइव के तहत रायपुर और दुर्ग पुलिस की साइबर विंग बैंकों के साथ मिलकर काम कर रही है। जिन खातों (Mule Accounts) में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है, उन्हें तत्काल ब्लॉक कराया जा रहा है। सुंदर नगर और पंडरी क्षेत्र के कई राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों से संदिग्ध लेन-देन का डेटा निकाला गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि खातों को समय पर फ्रीज कराने से पीड़ितों की डूबी हुई रकम को वापस दिलाने (Refund) में बड़ी मदद मिलेगी।
साइबर सेल छत्तीसगढ़ द्वारा जारी जरूरी एडवाइजरी:
पुलिस ने इस मेगा ड्राइव के साथ ही आम नागरिकों के लिए एक मार्गदर्शिका (Advisory) जारी की है:
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कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी (जैसे पुलिस, सीबीआई, कस्टम या ईडी) कभी भी व्हाट्सएप या स्काइप (Skype) वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या अरेस्ट नहीं करती। कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है।
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अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, आधार या बैंक डिटेल साझा न करें।
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घर बैठे बिना किसी मेहनत के हर दिन हजारों रुपये कमाने वाले लुभावने विज्ञापनों और टेलीग्राम लिंक से दूर रहें।
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यदि आप किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो बिना डरे तुरंत केंद्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती 1-2 घंटे (Golden Hours) में शिकायत होने पर पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है।
कंचन यादव
सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़