छत्तीसगढ़ के वनांचलों में अवैध विदेशी वित्तपोषण का महाखुलासा: ₹95 करोड़ की संदिग्ध आवक और बस्तर-धमतरी में करोड़ों के सुनियोजित व्यय का ED द्वारा पर्दाफाश।
बस्तर:छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में ईसाई धर्म के प्रचार के लिए विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया है की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी जिलों में ईसाई धर्म के प्रचार और अन्य गतिविधियों के लिए की जा रही संदिग्ध विदेशी फंडिंग का एक बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में 95 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आई है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर बस्तर क्षेत्र में इस्तेमाल किया गया है।
जांच से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
1. संदिग्ध 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) का नेटवर्क
ED की जांच में 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) नामक एक वैश्विक ईसाई मिशनरी संगठन का नाम सामने आया है। यह संस्था भारत में FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत पंजीकृत नहीं है, फिर भी अवैध रूप से भारी मात्रा में विदेशी धन भारत लाया गया।
2. अमेरिका से सीधा कनेक्शन
-
डेबिट कार्ड का खेल: जांच में खुलासा हुआ कि अमेरिका के Truist Bank द्वारा जारी किए गए डेबिट कार्ड्स को भारत लाया गया।
-
नकदी निकासी: इन कार्डों का उपयोग भारत भर के विभिन्न ATM से बार-बार नकदी निकालने के लिए किया गया।
-
मुख्य संदिग्ध: बेंगलुरु एयरपोर्ट से मीका मार्क नाम के एक व्यक्ति को 24 विदेशी डेबिट कार्ड के साथ पकड़ा गया था, जिससे इस पूरे नेटवर्क की कड़ी जुड़ी।
3. बस्तर और धमतरी में खर्च
ED के अनुसार, कुल 95 करोड़ रुपये में से लगभग 6.5 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों (विशेषकर बस्तर और धमतरी) में खर्च किए गए। एजेंसी का मानना है कि इन पैसों का उपयोग धार्मिक प्रचार और अन्य ऐसी गतिविधियों के लिए किया गया जो कानूनन संदिग्ध हैं।
4. सुरक्षा संबंधी चिंताएं
ED ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिना किसी सरकारी नियामक (Regulatory) चैनल के इतनी बड़ी राशि का नकद लेनदेन होना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इससे एक समानांतर अर्थव्यवस्था (Parallel Economy) विकसित होने का डर जताया गया है।
नोट: छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' भी पारित किया है, जिसमें अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विदेशी फंडिंग की जांच और कठोर दंड के प्रावधान किए गए हैं।
कंचन यादव
सहसंपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज