रायपुर PDS घोटाला: गरीबों के हक पर डाका, दुकान संचालक पर FIR दर्ज

रायपुर PDS घोटाला: गरीबों के हक पर डाका, दुकान संचालक पर FIR दर्ज

रायपुर के जोरा स्थित एक शासकीय उचित मूल्य दुकान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत बांटे जाने वाले राशन में लाखों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। खाद्य विभाग की सक्रियता और मीडिया के स्टिंग ऑपरेशन के बाद इस पूरे काले खेल का पर्दाफाश हुआ है।

मुख्य आरोपी और दुकान का विवरण

  • दुकान का स्थान: जोरा, रायपुर (शासकीय उचित मूल्य दुकान, आईडी क्रमांक: 442001026)

  • संचालक संस्था: महामाया खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति मर्यादित

  • मुख्य आरोपी: टोपेश्वर साहू (समिति अध्यक्ष सह विक्रेता)

  • कार्रवाई: तेलीबांधा पुलिस ने खाद्य विभाग की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैसे होता था 'काली कमाई' का खेल?

दैनिक भास्कर की जमीनी पड़ताल और स्टिंग ऑपरेशन में यह सामने आया कि डिजिटल सिस्टम होने के बावजूद दुकानदारों ने भ्रष्टाचार का नया तरीका ढूंढ निकाला है।

  1. अनाज की जगह पैसे का दबाव: रायपुर में गरीबों को तीन महीने का एकमुश्त राशन दिया जा रहा है। राशन दुकानों तक पहुंच भी रहा है, लेकिन हितग्राहियों को अनाज न देकर जबरन पैसे लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

  2. वजन मशीन से छेड़छाड़: राशन ऑनलाइन दर्ज करने के लिए जब वजन मशीन (पीओएस) पर एंट्री की बारी आती है, तो दुकानदार उस पर लोहे के बाट रख देते हैं। इससे डिजिटल रिकॉर्ड में चावल का वजन दर्ज हो जाता है, लेकिन असलियत में वह अनाज उपभोक्ता तक नहीं पहुंचता।

  3. मुनाफे का गणित: दुकानदार गरीबों को चावल के बदले ₹20 प्रति किलो का लालच या दबाव देते हैं, जबकि उसी सरकारी चावल को खुले बाजार में ₹25 से ₹30 प्रति किलो की दर से बेचकर प्रति किलो ₹5 से ₹10 की अवैध कमाई (काली कमाई) कर रहे हैं।

जांच में बड़ा खुलासा

खाद्य विभाग के औचक निरीक्षण में जोरा की इस दुकान से लगभग 389.24 क्विंटल चावल गायब (कम) पाया गया। विभाग द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जब समिति और विक्रेता द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तब विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई।

नियम क्या कहता है? नियमानुसार सभी उचित मूल्य दुकानदारों को उपभोक्ताओं को तय मात्रा में अनाज देना अनिवार्य है। अनाज के बदले नकद राशि का लेन-देन पूरी तरह गैर-कानूनी और दंडनीय है।

फिलहाल पुलिस और खाद्य विभाग की टीमें क्षेत्र की अन्य दुकानों पर भी नजर रख रही हैं ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

कंचन यादव /नारद एक्स्प्रेस न्यूज