सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: पोंजी स्कीम के धोखेबाजों को अब आसानी से नहीं मिलेगी जमानत
नई दिल्ली : देश में पोंजी स्कीम और वित्तीय घोटालों के जरिए आम जनता की गाढ़ी कमाई हड़पने वालों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे घोटालों में शामिल आरोपियों को अब आसानी से जमानत का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने इन अपराधों को 'गंभीर' श्रेणी में रखते हुए एक बड़ा कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित किया है।
'जमानत नियम है और जेल अपवाद' का सिद्धांत लागू नहीं
आमतौर पर फौजदारी मामलों में 'जमानत एक नियम है और जेल अपवाद' (Bail is the rule, Jail is an exception) का सिद्धांत लागू होता है, लेकिन पोंजी स्कीम जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि जो लोग मासूम नागरिकों की जीवनभर की बचत छीन लेते हैं, वे किसी भी रियायत के हकदार नहीं हैं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द करते हुए सुनाया, जिसमें एक धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी को जमानत दी गई थी।
हाई कोर्ट का तर्क: हाई कोर्ट ने आरोपी को इस आधार पर राहत दी थी कि उसके सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और मामला मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार: शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी लंबे समय से फरार था और ऐसे आर्थिक अपराध समाज के आर्थिक ढांचे पर प्रहार करते हैं, इसलिए इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।
प्रमुख बिंदु: सुप्रीम कोर्ट का संदेश
आर्थिक अपराध गंभीर: पोंजी स्कीम को केवल साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि समाज के विरुद्ध एक गंभीर अपराध माना जाएगा।
फरार आरोपियों पर सख्ती: लंबे समय तक कानून से भागने वाले आरोपियों को समानता (Parity) के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
निवेशकों की सुरक्षा: यह फैसला देशभर के उन लाखों निवेशकों के लिए बड़ी राहत है जो अपनी मेहनत की कमाई खो चुके हैं।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से भविष्य में वित्तीय धोखाधड़ी करने वालों के मन में डर पैदा होगा और निचली अदालतों को आर्थिक अपराधों में जमानत देते समय अधिक सतर्क रहने का दिशा-निर्देश मिलेगा।
रिपोर्टर : कंचन यादव
नारद एक्सप्रेस न्यूज