छत्तीसगढ़ सरकार का सख्त रुख: जनशिकायतों का 21 दिनों में निराकरण अनिवार्य, लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी

छत्तीसगढ़ सरकार का सख्त रुख: जनशिकायतों का 21 दिनों में निराकरण अनिवार्य, लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश के नगरीय निकायों और विभिन्न विभागों में बढ़ती जनशिकायतों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि आम जनता की समस्याओं और शिकायतों का 21 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाए। समय-सीमा में समाधान न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

नगरीय प्रशासन विभाग ने जारी किए निर्देश

नगरीय प्रशासन संचालनालय द्वारा सभी निगम आयुक्तों, क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों और नगर पालिका/नगर पंचायत के सीएमओ (CMO) को पत्र भेजकर कड़ी हिदायत दी गई है। शासन ने माना है कि शिकायतों के लंबित रहने से जनता का प्रशासन पर से भरोसा कम हो रहा है, जिसे सुधारना प्राथमिकता है।

समीक्षा और निगरानी का नया ढांचा

प्रशासनिक चुस्ती बनाए रखने के लिए सरकार ने त्रि-स्तरीय योजना बनाई है:

  • साप्ताहिक समीक्षा: सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को हर सप्ताह लंबित शिकायतों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • नोडल अधिकारियों की भूमिका: विभागों में नियुक्त नोडल अधिकारियों को व्यक्तिगत रुचि लेकर मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • ऑनलाइन ट्रैकिंग: प्रत्येक शिकायत के निराकरण के बाद उसकी जानकारी अनिवार्य रूप से pgportal.gov.in और janshikayat.cg.nic.in पर अपलोड करनी होगी।

50% से अधिक शिकायतों के लंबित होने पर जताई चिंता

सामान्य प्रशासन एवं जनशिकायत निवारण विभाग की हालिया समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

वर्तमान स्थिति: राज्य में लोक अर्जियों के 50% से अधिक प्रकरण लंबित हैं। खास तौर पर वे शिकायतें जो 21 दिनों की तय सीमा पार कर चुकी हैं, शासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।

श्रेणी विवरण
समय-सीमा अधिकतम 21 कार्य दिवस
अनिवार्यता पोर्टल पर ऑनलाइन स्टेटस अपडेट करना जरूरी
निगरानी शासन स्तर पर सीधे डैशबोर्ड से समीक्षा
दायरा समस्त निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतें

रेपोर्टर: कंचन यादव 

नारद एक्सप्रेस न्यूज