छत्तीसगढ़: 6 थानों को मिला 'विशेष दर्जा', अब सीधे कर सकेंगे SC-ST एक्ट के मामलों की जाँच
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की कानून व्यवस्था और सामाजिक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। इसके तहत प्रदेश के 6 थानों को विशेष अधिकार दिए गए हैं, जिससे वे अब अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के मामलों की सीधे तौर पर जाँच और कार्रवाई कर सकेंगे।
प्रमुख बिंदु: क्या बदलेगा?
जाँच का अधिकार: अब तक इन मामलों की जाँच के लिए विशिष्ट प्रक्रियाओं या जिला मुख्यालयों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब इन चिन्हित थानों के पास केस दर्ज करने और विवेचना करने की पूरी शक्ति होगी।
त्वरित न्याय: स्थानीय स्तर पर अधिकार मिलने से पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा इंतज़ार नहीं करना होगा और साक्ष्यों का संकलन भी तेज़ी से हो सकेगा।
विशिष्ट क्षेत्राधिकार: इन थानों को विशेष रूप से SC/ST वर्ग से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए नोडल केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का प्राथमिक लक्ष्य सुदूर और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और दलित समुदायों को कानूनी सहायता सुलभ कराना है। इस निर्णय से पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और मामलों के निपटारे की दर (Conviction Rate) में सुधार होने की संभावना है।
विशेष नोट: यह पहल गृह विभाग द्वारा पुलिस प्रशासन को अधिक समावेशी और जवाबदेह बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
नारद एक्सप्रेस न्यूज