"त्योहार छोड़ दफ्तर की चौखट पर बैठीं 'दीदियां', पूछा- साहब, वेतन के कागज दिखाएं या बच्चों को रोटी खिलाएं?"
नवा रायपुर | दिवाली से लेकर होली तक का त्योहार बीत गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिन प्रशिक्षकों और समन्वयकों की जेब खाली रही। पांच महीनों से वेतन के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रही महिला कार्यकर्ताओं का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। प्रदेश भर से जुटी सैकड़ों महिलाओं ने नवा रायपुर स्थित 'स्वास्थ्य भवन' में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के एमडी रणबीर शर्मा के दफ्तर का घेराव कर जमकर नारेबाजी की।
"क्या लेटर दिखाकर बच्चों का पेट भरें?"
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर था। जब एमडी रणबीर शर्मा कक्ष से बाहर आए, तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया। महिलाओं ने तल्ख लहजे में कहा, "पांच महीने से सिर्फ लेटर जारी हो रहे हैं, पैसे नहीं। क्या आपके लेटर दिखाकर बच्चों का पेट भरें?" शुरुआत में एमडी के तेवर कड़े नजर आए। दोपहर करीब 1:30 बजे उन्होंने प्रदर्शनकारियों से यहां तक कह दिया कि "जितना चिल्लाना है चिल्लाओ" और वापस अपने कक्ष में चले गए। इस व्यवहार ने आग में घी डालने का काम किया और महिलाओं ने पूरे गलियारे पर कब्जा कर लिया, जिससे दफ्तर का कामकाज ठप हो गया।
शाम होते ही ढीले पड़े एमडी के तेवर
बढ़ते विरोध और महिलाओं के डटे रहने के संकल्प को देखते हुए शाम 4:30 बजे एमडी दोबारा बाहर आए। जब प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ की अध्यक्ष सरोज सेंगर और प्रवक्ता सपना चौबे ने उन्हें पांच महीने की व्यथा सुनाई, तो एमडी ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया। अंततः उन्होंने स्वीकार किया कि वे नए आए हैं और मंगलवार को वेतन जारी करने का ठोस आदेश जारी करने का आश्वासन दिया।
क्यों अटका है 17 हजार कर्मियों का वेतन?
वेतन संकट के पीछे प्रशासनिक फेरबदल को मुख्य कारण माना जा रहा है:
• प्रबंधन में बदलाव: मितानिन कार्यक्रम पहले एक सामाजिक संस्था के पास था, जिसे डेढ़ साल पहले एनएचएम ने अपने हाथ में लिया था।
• अजीब व्यवस्था: अक्टूबर में काम फिर से पुरानी संस्था को सौंप दिया गया।
• विभाजन का शिकार: हैरानी की बात यह है कि 75 हजार मितानिनों का भुगतान तो समय पर हो रहा है, लेकिन उनकी मॉनिटरिंग करने वाले 700 ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और प्रशिक्षकों का वेतन फाइलों में उलझ गया है।
•स्थिति: बस्तर, सरगुजा, गरियाबंद और महासमुंद जैसे दूरस्थ जिलों से आई महिलाएं बोरिया-बिस्तर लेकर पहुंची थीं। उनका साफ कहना है कि जब तक आदेश हाथ में नहीं आता, वे घर वापस नहीं जाएंगी।
रिपोर्टर:कंचन यादव
नारद एक्सप्रेस न्यूज़