नौकरी का लालच और देवी-देवताओं का अपमान! रायपुर के कैफे में चल रहे धर्मांतरण के खेल का हिंदू संगठन ने किया भंडाफोड़

नौकरी का लालच और देवी-देवताओं का अपमान! रायपुर के कैफे में चल रहे धर्मांतरण के खेल का हिंदू संगठन ने किया भंडाफोड़

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में सोमवार को उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब डिवाइन कैफे में चल रही एक सभा में हिंदू संगठनों ने धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

घटना का मुख्य विवरण

  • आरोप: हिंदू संगठनों का दावा है कि सभा में ईसाई समुदाय के कुछ लोग लगभग 100-150 लोगों को निजी नौकरी और बेहतर इलाज का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

  • विवाद की जड़: शिकायतकर्ता योगेश बरिहा के अनुसार, आरोपियों ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की और ईसाई धर्म को श्रेष्ठ बताया।

  • कार्रवाई: हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। इस मामले में पुलिस ने सैफीन, आमीन, उदय और श्रीकांत नामक चार युवकों को हिरासत में लिया है, जबकि कुछ अन्य फरार बताए जा रहे हैं।


धर्मांतरण और मतांतरण: क्या है अंतर?

इस घटना के परिप्रेक्ष्य में यह समझना आवश्यक है कि कानूनी और सामाजिक रूप से इन दोनों शब्दों के क्या अर्थ हैं:

श्रेणी विवरण
धर्मांतरण यह एक आधिकारिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को अपना पुराना धर्म त्याग कर नया धर्म अपनाना होता है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पूर्व सूचना देना और सरकारी दस्तावेजों (जैसे सरनेम बदलना) में बदलाव करना अनिवार्य है।
मतांतरण इसमें व्यक्ति की आस्था और मान्यताओं में परिवर्तन होता है। वह नए धर्म का पालन तो शुरू कर देता है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इसका कोई औपचारिक पंजीकरण नहीं होता।

( डिवाइन कैफे,यही पर सभा चल रही थी )

छत्तीसगढ़ में क्या है कानून?

वर्तमान में राज्य में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 प्रभावी है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सजा का प्रावधान: बलपूर्वक या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने पर 1 वर्ष की जेल या 5,000 रुपये जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।

  • नया प्रस्तावित कानून (2024): साय सरकार इस कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है। नए मसौदे के अनुसार, विवाह या कपटपूर्ण तरीके से किया गया धर्मांतरण अवैध होगा।

  • अनिवार्य सत्यापन: नए नियमों के तहत धर्मांतरण के बाद 60 दिनों के भीतर जिला प्रशासन के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सत्यापन कराना अनिवार्य होगा, अन्यथा उसे अवैध माना जाएगा।

पुलिस फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले की विस्तृत जाँच जारी है।

छत्तीसगढ़ के प्रस्तावित धार्मिक स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2024 के उन प्रमुख बिंदुओं और 17 विशेष प्रावधानों की जानकारी नीचे दी गई है, जिन्हें साय सरकार और अधिक सख्त बनाने की तैयारी में है:

छत्तीसगढ़ के नए धर्मांतरण कानून के मुख्य 17 बिंदु और प्रावधान

सरकार ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर इस ड्राफ्ट को तैयार किया है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

  1. कलेक्टर को पूर्व सूचना: किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को एक तय प्रारूप में सूचना देनी होगी।

  2. धर्मांतरण कराने वाले की जिम्मेदारी: जो व्यक्ति (धर्म गुरु या संस्था) धर्मांतरण करा रहा है, उसे भी एक महीने पहले प्रशासन को सूचित करना होगा।

  3. कठोर सजा का प्रावधान: अवैध रूप से (भय, प्रलोभन या कपट से) धर्म परिवर्तन कराने पर कम से कम 2 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है।

  4. भारी जुर्माना: जेल के साथ-साथ कम से कम 25,000 रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

  5. सामूहिक धर्मांतरण पर रोक: यदि एक साथ कई लोगों का धर्मांतरण कराया जाता है, तो सजा और भी अधिक (3 से 10 साल तक) होगी।

  6. नाबालिग और महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा: SC/ST, महिलाओं या नाबालिगों के अवैध धर्मांतरण के मामले में सजा की अवधि और जुर्माने की राशि सामान्य मामलों से अधिक होगी।

  7. शादी के लिए धर्मांतरण: यदि केवल विवाह के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन किया गया है या जबरन विवाह कर धर्म बदला गया है, तो ऐसी शादियों को 'शून्य' (अमान्य) घोषित किया जा सकता है।

  8. प्रलोभन की स्पष्ट परिभाषा: इसमें नकद राशि, उपहार, मुफ्त शिक्षा, बेहतर नौकरी या 'ईश्वरीय कृपा' का झांसा देना भी शामिल है।

  9. पुनः धर्मांतरण (घर वापसी): यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म (Original Religion) में वापस लौटता है, तो इसे 'धर्मांतरण' की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा और इसके लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

  10. शिकायत का अधिकार: पीड़ित व्यक्ति के अलावा उसके माता-पिता, भाई-विवाह या रक्त संबंधी भी पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  11. गैर-जमानती अपराध: इस कानून के तहत दर्ज मामले गैर-जमानती (Non-Bailable) होंगे।

  12. सबूत का भार (Burden of Proof): यह साबित करने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति पर होगी जिसने धर्मांतरण कराया है कि वह अवैध नहीं था।

  13. संस्थाओं पर कार्रवाई: यदि कोई संस्था या NGO इसमें शामिल पाई जाती है, तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।

  14. 60 दिन बाद का डिक्लेरेशन: धर्मांतरण के 60 दिनों के भीतर व्यक्ति को दोबारा DM के सामने पेश होकर पुष्टि करनी होगी कि उसने स्वेच्छा से ऐसा किया है।

  15. सार्वजनिक प्रदर्शन: जिला प्रशासन धर्मांतरण की सूचना को सार्वजनिक नोटिस बोर्ड पर चस्पा करेगा ताकि कोई आपत्ति हो तो दर्ज कराई जा सके।

  16. पुलिस जाँच: सूचना मिलने के बाद पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि धर्मांतरण के पीछे कोई दबाव या बाहरी फंडिंग तो नहीं है।

  17. क्षतिपूर्ति: न्यायालय आरोपी को आदेश दे सकता है कि वह पीड़ित को आर्थिक मुआवजा दे।


निष्कर्ष

रायपुर की इस घटना के बाद शासन इन नियमों को जल्द से जल्द विधानसभा में पेश कर कानून बनाने की तैयारी में है, ताकि चंगाई सभा जैसी गतिविधियों के जरिए होने वाले कथित अवैध धर्मांतरण पर लगाम लगाई जा सके।

मयंक श्रीवास्तव 

चीफ एडिटर/नारद एक्स्प्रेस न्यूज