छत्तीसगढ़ में फाइलेरिया 'हाथीपांव' के विरुद्ध 'जंग'; स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर खिलाएंगे दवा

"छत्तीसगढ़ में कल से शुरू हो रहे फाइलेरिया रोधी अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवा खिलाएंगे। हाथीपांव से बचाव के लिए 2 वर्ष से अधिक उम्र के सभी नागरिकों हेतु दवा अनिवार्य है। जानें अभियान की पूरी रणनीति और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन्स।"

छत्तीसगढ़ में फाइलेरिया 'हाथीपांव' के विरुद्ध 'जंग'; स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर खिलाएंगे दवा

[मुख्य समाचार] छत्तीसगढ़ को हाथीपांव (फाइलेरिया) जैसी लाइलाज बीमारी के कलंक से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार कल, 10 फरवरी से प्रदेशव्यापी निर्णायक अभियान शुरू करने जा रही है। इस महाअभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें और 'मितानिनें' प्रदेश के हर घर में दस्तक देंगी और अपनी मौजूदगी में फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन सुनिश्चित कराएंगी।

अभियान की 5 बड़ी बातें (Key Highlights):

  1. वितरण नहीं, मौके पर सेवन: इस बार दवा घर पर छोड़ी नहीं जाएगी। मितानिनें दवा लेकर आएंगी और हितग्राही को अपने सामने ही दवा खिलाएंगी (Spot Consumption)।

  2. मितानिन सेना का मोर्चा: छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ 'मितानिनें' इस अभियान की मुख्य सूत्रधार होंगी, जिन्हें ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

  3. ट्रिपल ड्रग थेरेपी (IDA): प्रदेश के उच्च-जोखिम वाले जिलों में आइवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल की खुराक दी जाएगी, जो संक्रमण की कड़ी को तोड़ने में सक्षम है।

  4. मुफ्त सुरक्षा कवच: शासन द्वारा यह दवा पूरी तरह निशुल्क है। यह दवा न केवल फाइलेरिया से बचाती है, बल्कि पेट के अन्य कीड़ों को भी खत्म करती है।

  5. टारगेट 2027: भारत सरकार के वर्ष 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को छत्तीसगढ़ समय से पहले पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञ की राय: क्यों जरूरी है यह दवा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फाइलेरिया का मच्छर काटने के बाद 5 से 15 साल तक इसके लक्षण (पैरों या हाथ में भारी सूजन) नहीं दिखते। जब तक लक्षण उभरते हैं, तब तक बीमारी लाइलाज हो चुकी होती है। इसीलिए, स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति को भी दवा लेना अनिवार्य है ताकि उसके शरीर के भीतर छिपे सूक्ष्म परजीवी खत्म हो सकें।

साइड इफेक्ट्स से न डरें

यदि दवा लेने के बाद हल्का बुखार, चक्कर या खुजली महसूस हो, तो घबराएं नहीं। यह इस बात का प्रमाण है कि दवा शरीर के भीतर फाइलेरिया के कीटाणुओं को नष्ट कर रही है। ऐसी स्थिति के लिए हर ब्लॉक में 'रैपिड रिस्पांस टीम' (RRT) तैनात रहेगी।

विभागीय अपील:

"हाथीपांव एक ऐसी बीमारी है जो इंसान को समाज में उपेक्षित और शारीरिक रूप से अक्षम बना देती है। कल जब मितानिन आपके घर आएं, तो दवा जरूर खाएं। याद रखें, दवा की एक खुराक, सुरक्षित रखेगी सात पुश्तें।"

ब्यूरो रिपोर्ट: नारद एक्सप्रेस न्यूज़, रायपुर